आखिर क्यों किया जाता है गणपति जी का विसर्जन, क्या है पीछे की पौराणिक कथा

आज गणपति विसर्जन है. अनंत चतुर्दशी के दिन घमपति बप्पा का विसर्जन होता है. गणेश चुतर्थी के दिन लोग अपने घरों में गणेश जी की प्रतिमा का स्थापित करते हैं. फिर इन्हें पूरे आदर-सत्कार के साथ एक, तीन, पांच या दस दिन अपने घर पर रखते हैं और इसके बाद इनका विधि-विधान के साथ विसर्जन करते हैं. लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि आखिर गणपति बप्पा का विसर्जन क्यों किया जाता है. इसके पीछे एक पौराणिक कथा है. आइए जानते हैं उसके बारे में

गणेश विसर्जन पौराणिक कथा

माना जाता है कि अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान गणपति को जल में विसर्जित कर दिया जाता है क्योंकि वो जल तत्व के अधिपति हैं. पुराणों के अनुसार, वेद व्यास जी भगवान गणेश को कथा सुनाते थे और बप्पा उसे लिखते थे. कथा सुनाते समय वेद व्यास जी ने अपने नेत्र बंद कर लिए. वो 10 दिन तक कथा सुनाते गए और बप्पा उसे लिखते गए. लेकिन जब दस दिन बाद वेद व्यास जी ने अपने नेत्र खोले तो देखा कि गणपति जी के शरीर का तापमान बहुत ज्यादा बढ़ गया था. वेद व्यास जी ने उनका शरीर ठंडा करने के लिए ही उन्हें जल में डुबा दिया जिससे उनका शरीर ठंडा हो गया. कहा जाता है कि उसी समय से यह मान्यता चली आ रही है कि गणेश जी को शीतल करने के लिए ही गणेश विसर्जन किया जाता है.

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ऐसे करें विसर्जन

बप्पा का विसर्जन करने के लिए सबसे पहले सुबह स्नान करने के बाद गणेश जी की पूजा करें और उनके प्रिय चीजों का भोग लगाएं. पूजा के दौरान गणेश मंत्र और गणेश आरती का पाठ करें. इस दौरान स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं और बप्पा के विसर्जन की तैयारियां शुर कर दें.

यह लेख मूल रूप से प्रकाशित किया गया था इंडिया

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