साल के ये 5 दिन मां लक्ष्मी की पूजा के लिए होते हैं विशेष और मिलता है मनचाहा फल

महालक्ष्मी (Maha Lakshmi) की पूजा करने वाले घर में हमेशा सुख-शांति के साथ समृद्धि बनी रहती है. हिंदू धर्म के अनुसार शुक्रवार (Friday) के दिन शादीशुदा महिलाएं मां लक्ष्मी (Maa Lakshmi) की पूजा करती हैं. ऐसा करने से घर में पैसों (Money) की समस्या समाप्त होती है और सुख-शांति (Happiness and Peace) का विस्तार होता है. धन और संपत्ति की अधिष्ठात्री देवी मां लक्ष्मी का जन्म समुद्र से हुआ था. इनकी पूजा करने से सिर्फ धन की ही प्राप्ति नहीं होती है बल्कि वैभव भी प्राप्त होता है. शास्त्रों में मां लक्ष्मी की खास कृपा प्राप्त करने के लिए कुछ खास दिन बताए हैं. ये दिन न सिर्फ महालक्ष्मी को प्रसन्न के लिए ही हैं बल्कि योग साधना के लिए भी महत्वपूर्ण हैं. आइए जानते हैं उन पांच दिनों के बारे में, जिनमें महालक्ष्मी की पूजा करने से खास कृपा प्राप्त कर सकते हैं.

राधाष्टमी

भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी को राधाष्टमी का पर्व मनाया जाता है. शुक्ल पक्ष की अष्टमी से लेकर कृष्ण पक्ष की अष्टमी का काल सुरैया कहलाता है. समृद्धि प्राप्त करने के लिए यह बेहद पवित्र काल खंड है क्योंकि इस महापर्व को लक्ष्मी साधना का पर्व माना गया है. इसलिए देश के कई भागों में यह पर्व लक्ष्मी उपासना के रूप में ही जाना जाता है. इन दिनों यक्षिणी और योगिनी साधना का अतिमहत्व है और आध्यात्मिक मान्यताएं यक्ष-यक्षिणी को स्थूल समृद्धि का नियंता मानती है. बता दें कि कुबेर यक्षराज और लक्ष्मी यक्षिणी हैं. जो भी भक्त सच्चे मन से महालक्ष्मी की पूजा करते हैं उस पर मां की विशेष कृपा बनी रहती है.

शरद पूर्णिमा

आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहते हैं. शरद पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है. मान्यता है कि इस दिन माता लक्ष्मी रात में विचरण करती हैं और अपने भक्तों को धन-धान्य से पूर्ण करती हैं. शरद पूर्णिमा की पूरी रात मां लक्ष्मी का जागरण और उनकी स्तुति करना धन समृद्धि दायक माना गया है. इस रात में कौड़ी खेलने की भी प्रथा है. शास्त्रों में बताया गया है कि जो भी भक्त रातभर मां लक्ष्मी की अराधना करता है, उसको कभी किसी चीज की कमी नहीं होती है.

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रुक्मिणी अष्टमी

पौष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रुक्मिणी अष्टमी मनाई जाती है. भगवान कृष्ण की पत्नी रुक्मिणी को देवी लक्ष्मी का अवतार माना जाता है. भगवान कृष्ण का जन्म भी अष्टमी तिथि को हुआ, राधाजी का जन्म भी अष्टमी तिथि को हुआ और रुक्मिणीजी का भी जन्म अष्टमी तिथि को ही हुआ था. इसलिए अष्टमी तिथि को हर कार्य के लिए शुभ माना जाता है. कहते हैं जो भी भक्त भगवान कृष्ण के साथ साथ माता रुक्मणी की पूजा करता है, उनके घर धन-धान्य की वृद्धि होती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है.

वरद लक्ष्मी

स्‍कंदपुराण में इस दिन व्रत रखकर मां लक्ष्‍मी को प्रसन्‍न करने का विधान बताया गया है. दीपावली की तरह इस दिन भी गणेश और लक्ष्‍मीजी दोनों की पूजा की जाती है. शास्त्रों में मां लक्ष्मी की खास कृपा प्राप्त करने के लिए इस दिन कलश बैठाकर वर मुद्रा वाली देवी लक्ष्मी की पूजा करना उत्तम बताया गया है. मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने से सौभाग्य और संपत्ति में वृद्धि होती है. इस दिन कनक धारा स्तोत्र का पाठ भी फलदायी होता है.

दीपावली

कार्तिक मास के कृष्‍ण पक्ष की अमावस्या तिथि को दीपावली का पर्व मनाया जाता है. दीपावली हिंदू धर्म का सबसे बड़ा त्योहार है. इसे महानिशा की रात भी कहा जाता है. इस रात महालक्ष्मी की पूजा करने से न सिर्फ समृद्धि बढ़ती है बल्कि सिद्धियां भी प्राप्त होती है. मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए दिवाली की रात बहुत उत्तम मानी जाती है, जिसमें मां वैभव का भी आशीर्वाद प्रदान करती हैं. मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान महालक्ष्मी धरती पर प्रकट हुई थीं.

यह लेख मूल रूप से प्रकाशित किया गया था न्यूज़18

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